नंदापथ एक्सप्रेस :
नंदा देवी ऐतिहासिक ‘बड़ी जात’ के लिए मुख्यमंत्री धामी को आमंत्रण, 5 सितंबर से शुरू होगी ऐतिहासिक यात्रा; विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष ने निर्जन पड़ावों पर व्यवस्थाओं को लेकर की वार्ता

उत्तराखंड की अलौकिक लोक आस्था और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के प्रतीक, सिद्धपीठ कुरुड़ में आयोजित होने वाली ऐतिहासिक श्री नंदा देवी राजराजेश्वरी ‘बड़ी जात’ के शुभारंभ का समय नजदीक आ गया है। इस पावन अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।
थराली विधायक भूपाल राम टम्टा और चमोली जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट ने देहरादून में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें 5 सितंबर को कुरुड़ पहुंचने का औपचारिक निमंत्रण पत्र सौंपा। इस दौरान मेला कमेटी से जुड़े राकेश गौड़ भी उनके साथ मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से 5 सितंबर को कुरुड़ पहुंचकर मां नंदा देवी की डोली के प्रस्थान के साक्षी बनने और मां का आशीर्वाद प्राप्त करने का विशेष आग्रह किया।
5 सितंबर को सिद्धपीठ कुरुड़ से प्रस्थान करेगी मां नंदा की डोली
सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर मां नंदा देवी की ‘बड़ी जात’ (लोकजात यात्रा) का मुख्य उद्गम व केंद्र बिंदु है। 5 सितंबर को कुरुड़ में विशेष पूजा-विधान और वेद ऋचाओं के उच्चारण के बीच मां नंदा की डोली अपने पारंपरिक पड़ावों के लिए प्रस्थान करेगी।
दुर्गम व निर्जन पड़ावों पर चाक-चौबंद व्यवस्थाओं पर जोर
मुलाकात के दौरान विधायक भूपाल राम टम्टा और जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट ने मुख्यमंत्री के सामने बड़ी जात की तैयारियों और व्यवस्थाओं का खाका रखा। जनप्रतिनिधियों ने बताया कि इस यात्रा में श्रद्धालुओं को कई बेहद कठिन और निर्जन पड़ावों से गुजरना पड़ता है, जहां मूलभूत सुविधाओं का होना अत्यंत आवश्यक है।
यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए निम्नलिखित विशेष व्यवस्थाओं की मांग की गई:
- निर्जन पड़ावों पर भोजन व राशन: यात्रा के कठिन व निर्जन पड़ावों पर श्रद्धालुओं और ध्याणियों के लिए पर्याप्त भोजन, लंगर और राशन की पुख्ता व्यवस्था।
- हेली इमरजेंसी सेवा: किसी भी आपात स्थिति, दुर्घटना या गंभीर बीमारी से निपटने के लिए यात्रा मार्ग पर ‘हेली रेस्क्यू/हेली एम्बुलेंस’ सेवा की तैनाती।
- स्वास्थ्य एवं मेडिकल सुविधाएं: पैदल यात्रा मार्गों और दूरस्थ पड़ावों पर सचल चिकित्सा दलों (मेडिकल टीमों), एम्बुलेंस, आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयों व ऑक्सीजन सिलेंडरों की उपलब्धता।
- सड़क, पेयजल व विश्राम: निर्जन क्षेत्रों में अस्थाई शौचालयों, स्वच्छ पेयजल, रात को रुकने हेतु वॉटरप्रूफ टेंट/रेन शेल्टर और पैदल मार्गों की तत्काल मरम्मत।
लोक संस्कृति और अगाध श्रद्धा का संगम
कुरुड़ से शुरू होने वाली नंदा देवी की ‘बड़ी जात’ पहाड़ की सदियों पुरानी सांस्कृतिक जड़ों और सामूहिक आस्था का सजीव प्रमाण है। यात्रा के दौरान पूरा क्षेत्र ढोल-दमाऊ, रणसिंगा और पारंपरिक चांचरी-जागरों की गूंज से भक्तिमय हो उठता है।